Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.147.11: उस समय उसने पकड़े हुए कबूतर को पिंजरे से मुक्त कर दिया और अपनी लाठी, डंडा, जाल और पिंजरा - सब कुछ वहीं छोड़ दिया ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.147: बहेलियेका वैराग्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो यष्टिं शलाकां च क्षारकं पञ्जरं तथा।
तां च बद्धां कपोतीं स प्रमुच्य विससर्ज ह॥ ११॥
अनुवाद
उस समय उसने पकड़े हुए कबूतर को पिंजरे से मुक्त कर दिया और अपनी लाठी, डंडा, जाल और पिंजरा - सब कुछ वहीं छोड़ दिया ॥11॥
At that time, he released the captured pigeon from the cage and left behind his stick, rod, net and cage – everything. ॥11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि लुब्धकोपरतौ सप्तचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें बहेलियेकी उपरतिविषयक एक सौ सैतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥