श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 147: बहेलियेका वैराग्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.147.1 
भीष्म उवाच
तत: स लुब्धक: पश्यन् क्षुधयापि परिप्लुत:।
कपोतमग्निपतितं वाक्यं पुनरुवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! जब शिकारी ने भूखा होने पर भी देखा कि कबूतर आग में कूद पड़ा है, तो वह दुःखी हो गया और यह कहने लगा -
 
Bhishma says - King! Despite being hungry, when the hunter saw that the pigeon jumped into the fire, he became sad and started saying this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)