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mahabharat 12.146.9: कबूतर की यह बात सुनकर शिकारी बोला, 'इस समय मुझे सर्दी लग रही है, इसलिए मुझे इससे बचाने के लिए कुछ करो।'   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.146.9 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा शकुनेर्लुब्धकोऽब्रवीत्।
बाधते खलु मे शीतं संत्राणं हि विधीयताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कबूतर की यह बात सुनकर शिकारी बोला, 'इस समय मुझे सर्दी लग रही है, इसलिए मुझे इससे बचाने के लिए कुछ करो।'
 
On hearing this from the pigeon, the hunter said, 'Right now I am suffering from cold; so do something to save me from this.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)