पञ्चयज्ञांस्तु यो मोहान्न करोति गृहाश्रमे।
तस्य नायं न च परो लोको भवति धर्मत:॥ ७॥
अनुवाद
धर्म के अनुसार जो मनुष्य गृहस्थ अवस्था में रहते हुए भी पंचमहायज्ञों का अनुष्ठान नहीं करता, वह न तो इस लोक को प्राप्त करता है और न ही परलोक को ॥7॥
According to Dharma, he who, despite being in the householder's stage, does not perform the five great sacrifices, neither attains this world nor the next. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)