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mahabharat 12.146.6: यद्यपि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर आने वाले अतिथियों का उचित आदर और सत्कार करना चाहिए, तथापि यह पंच यज्ञ करने के अधिकारी गृहस्थ का प्राथमिक कर्तव्य है।   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.146.6 
शरणागतस्य कर्तव्यमातिथ्यं हि प्रयत्नत:।
पञ्चयज्ञप्रवृत्तेन गृहस्थेन विशेषत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर आने वाले अतिथियों का उचित आदर और सत्कार करना चाहिए, तथापि यह पंच यज्ञ करने के अधिकारी गृहस्थ का प्राथमिक कर्तव्य है।
 
Although everyone should treat guests with due respect and hospitality when they come to their homes, this is the primary duty of a householder who is entitled to perform the Pancha Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)