Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.146.26: कबूतर को ऐसी अवस्था में देखकर शिकारी ने बहुत विलाप किया, अपने कर्मों की निन्दा की और बहुत सी बातें कहीं।   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.146.26 
एवं बहुविधं भूरि विललाप स लुब्धक:।
गर्हयन् स्वानि कर्माणि द्विजं दृष्ट्वा तथागतम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कबूतर को ऐसी अवस्था में देखकर शिकारी ने बहुत विलाप किया, अपने कर्मों की निन्दा की और बहुत सी बातें कहीं।
 
Seeing the pigeon in such a state, the hunter lamented a lot, criticizing his own deeds and saying many things. 26.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि कपोतलुब्धकसंवादे षट्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें कबूतर और व्याधका संवादविषयक एक सौ छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)