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mahabharat 12.146.24: पक्षी को आग के अंदर देखकर शिकारी को चिंता होने लगी, “मैंने क्या किया है?”   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.146.24 
अग्निमध्ये प्रविष्टं तु लुब्धो दृष्ट्वा तु पक्षिणम्।
चिन्तयामास मनसा किमिदं वै मया कृतम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पक्षी को आग के अंदर देखकर शिकारी को चिंता होने लगी, “मैंने क्या किया है?”
 
Seeing the bird inside the fire, the hunter began to worry, “What have I done?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)