vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग
»
श्लोक 24
श्लोक
12.146.24
अग्निमध्ये प्रविष्टं तु लुब्धो दृष्ट्वा तु पक्षिणम्।
चिन्तयामास मनसा किमिदं वै मया कृतम्॥ २४॥
अनुवाद
पक्षी को आग के अंदर देखकर शिकारी को चिंता होने लगी, “मैंने क्या किया है?”
Seeing the bird inside the fire, the hunter began to worry, “What have I done?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×