Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.146.23: ऐसा कहकर और अतिथि पूजन की प्रतिज्ञा करके उस अत्यंत बुद्धिमान पक्षी ने अग्निदेव की तीन बार परिक्रमा की और हँसता हुआ अग्नि में प्रवेश कर गया॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: कृतप्रतिज्ञो वै स पक्षी प्रहसन्निव।
तमग्निं त्रि:परिक्रम्य प्रविवेश महामति:॥ २३॥
अनुवाद
ऐसा कहकर और अतिथि पूजन की प्रतिज्ञा करके उस अत्यंत बुद्धिमान पक्षी ने अग्निदेव की तीन बार परिक्रमा की और हँसता हुआ अग्नि में प्रवेश कर गया॥ 23॥
Having said this and having pledged to worship the guest, that extremely intelligent bird circled around Agnidev thrice and entered the fire smilingly.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥