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mahabharat 12.146.22: सौम्य! अतः आज मैंने भी अतिथि की उत्तम पूजा करने का निश्चय किया है। कृपया मुझे स्वीकार करें और मुझ पर कृपा करें। मैं आपसे सत्य कह रहा हूँ।'॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.146.22 
कुरुष्वानुग्रहं सौम्य सत्यमेतद् ब्रवीमि ते।
निश्चिता खलु मे बुद्धिरतिथिप्रतिपूजने॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! अतः आज मैंने भी अतिथि की उत्तम पूजा करने का निश्चय किया है। कृपया मुझे स्वीकार करें और मुझ पर कृपा करें। मैं आपसे सत्य कह रहा हूँ।'॥22॥
 
'Soumya! Therefore, today I have also decided to do the best worship of the guest. Please accept me and be kind to me. I am telling you the truth.'॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)