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mahabharat 12.146.19: थोड़ी देर बाद उसे कुछ याद आया और उसने शिकारी से कहा - 'अच्छा, थोड़ी देर रुको। मैं तुम्हारी प्यास बुझा दूँगा।'॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.146.19 
मुहूर्ताल्लब्धसंज्ञस्तु स पक्षी पक्षिघातिनम्।
उवाच तर्पयिष्ये त्वां मुहूर्तं प्रतिपालय॥ १९॥
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद उसे कुछ याद आया और उसने शिकारी से कहा - 'अच्छा, थोड़ी देर रुको। मैं तुम्हारी प्यास बुझा दूँगा।'॥19॥
 
After a while, he remembered something and said to the hunter - 'Okay, wait for a while. I will satisfy your thirst.'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)