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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग
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श्लोक 14
श्लोक
12.146.14
हर्षेण महताऽऽविष्टो वाक्यं व्याकुललोचन:।
तथेमं शकुनिं दृष्ट्वा विधिदृष्टेन कर्मणा॥ १४॥
अनुवाद
शास्त्रानुसार सम्मान पाकर उसने अश्रुपूर्ण नेत्रों से कबूतर की ओर देखा और बड़े हर्ष से कहा-॥14॥
Having received the honour according to the scriptures, he looked at the pigeon with teary eyes and said with great joy -॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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