श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.146.11 
स गत्वाङ्गारकर्मान्तं गृहीत्वाग्निमथागमत्।
तत: शुष्केषु पर्णेषु पावकं सोऽप्यदीपयत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह लोहार के घर गया और आग ले आया तथा उसे सूखे पत्तों पर रखकर उसने आग जला दी।
 
He went to the blacksmith's house and brought fire and placing it on dry leaves, he lit the fire there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)