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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग
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श्लोक 10
श्लोक
12.146.10
एवमुक्तस्तत: पक्षी पर्णान्यास्तीर्य भूतले।
यथाशक्त्या हि पर्णेन ज्वलनार्थं द्रुतं ययौ॥ १०॥
अनुवाद
उसके ऐसा कहने पर पक्षी ने बहुत से पत्ते पृथ्वी पर रख दिए और अपने पंखों से अग्नि लाने के लिए तीव्र गति से उड़ चला॥10॥
On his saying so, the bird placed a lot of leaves on the earth and flew with its wings as fast as possible to bring fire.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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