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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 146: कबूतरके द्वारा अतिथि-सत्कार और अपने शरीरका बहेलियेके लिये परित्याग
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श्लोक 1
श्लोक
12.146.1
भीष्म उवाच
स पत्न्या वचनं श्रुत्वा धर्मयुक्तिसमन्वितम्।
हर्षेण महता युक्तो वाक्यं व्याकुललोचन:॥ १॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! अपनी पत्नी की धर्मसंगत और तर्कपूर्ण सलाह सुनकर कबूतर बहुत प्रसन्न हुआ। उसकी आँखों में आनन्द के आँसू आ गए।
Bhishmaji says - King! The pigeon was very happy to hear the righteous and logical advice of his wife. Tears of joy welled up in his eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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