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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.144.2 
तस्य कल्यगता भार्या चरितुं नाभ्यवर्तत।
प्राप्तां च रजनीं दृष्ट्वा स पक्षी पर्यतप्यत॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसकी पत्नी सुबह-सुबह घास खाने बाहर गई थी और वापस नहीं लौटी। अब जब रात हो गई थी, तो कबूतर को उसकी चिंता होने लगी।
 
His wife had gone out to eat grass early in the morning and did not return. Now that it was night, the pigeon began to worry about her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)