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mahabharat 12.144.17: जिसके घर में पतिव्रता और मधुरभाषी पत्नी न हो, उसे वन में जाना चाहिए; क्योंकि उसके लिए वन ही घर के समान है।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.144.17 
यस्य भार्या गृहे नास्ति साध्वी च प्रियवादिनी।
अरण्यं तेन गन्तव्यं यथारण्यं तथा गृहम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिसके घर में पतिव्रता और मधुरभाषी पत्नी न हो, उसे वन में जाना चाहिए; क्योंकि उसके लिए वन ही घर के समान है।॥17॥
 
'He who does not have a pious and sweet-talking wife at home should go to the forest; because for him the forest is like his home.'॥ 17॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि भार्याप्रशंसायां चतुश्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें पत्नीकी प्रशंसाविषयक एक सौ चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)