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mahabharat 12.144.16: इस संसार में स्त्री के समान कोई मित्र नहीं है, स्त्री के समान कोई आश्रय नहीं है और स्त्री के समान कोई ऐसा नहीं है जो धर्म के संचय में सहायक हो।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.144.16 
नास्ति भार्यासमो बन्धुर्नास्ति भार्यासमा गति:।
नास्ति भार्यासमो लोके सहायो धर्मसंग्रहे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में स्त्री के समान कोई मित्र नहीं है, स्त्री के समान कोई आश्रय नहीं है और स्त्री के समान कोई ऐसा नहीं है जो धर्म के संचय में सहायक हो।॥16॥
 
‘In this world there is no friend like a woman, no shelter like a woman and no one like a woman who can help one in the accumulation of Dharma.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)