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mahabharat 12.144.15: जो पुरुष किसी रोग से पीड़ित हो और बहुत समय से कष्ट में पड़ा हो, उस पीड़ित व्यक्ति के लिए स्त्री के समान कोई औषधि नहीं है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.144.15 
तथा रोगाभिभूतस्य नित्यं कृच्छ्रगतस्य च।
नास्ति भार्यासमं किंचिन्नरस्यार्तस्य भेषजम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष किसी रोग से पीड़ित हो और बहुत समय से कष्ट में पड़ा हो, उस पीड़ित व्यक्ति के लिए स्त्री के समान कोई औषधि नहीं है ॥15॥
 
'For a man who is suffering from a disease and has been in trouble for a long time, there is no medicine like a woman for that suffering person. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)