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mahabharat 12.144.14: पुरुष की मुख्य सम्पत्ति उसकी पत्नी है। यदि मनुष्य इस संसार में असहाय भी हो, तो भी उसकी पत्नी ही उसे संसार यात्रा में सहायता करती है।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.144.14 
भार्या हि परमो ह्यर्थ: पुरुषस्येह पठॺते।
असहायस्य लोकेऽस्मिंल्लोकयात्रासहायिनी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पुरुष की मुख्य सम्पत्ति उसकी पत्नी है। यदि मनुष्य इस संसार में असहाय भी हो, तो भी उसकी पत्नी ही उसे संसार यात्रा में सहायता करती है।॥14॥
 
‘A man's main asset is his wife. Even if a person is helpless in this world, it is his wife who helps him in his journey through this world.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)