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mahabharat 12.144.13: धर्म, अर्थ और काम में पुरुष की पत्नी ही उसकी मुख्य सहायक होती है। परदेश जाने पर भी वह उसकी विश्वसनीय सखी होती है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.144.13 
धर्मार्थकामकालेषु भार्या पुंस: सहायिनी।
विदेशगमने चास्य सैव विश्वासकारिका॥ १३॥
 
 
अनुवाद
धर्म, अर्थ और काम में पुरुष की पत्नी ही उसकी मुख्य सहायक होती है। परदेश जाने पर भी वह उसकी विश्वसनीय सखी होती है।॥13॥
 
‘A man's wife is his main helper in matters of Dharma, Artha and Kama. Even when he goes abroad, she acts as his trusted friend.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)