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mahabharat 12.144.11: वह तपस्विनी स्त्री जानती है कि मैं थका हुआ, क्षीण और भूखा हूँ, परन्तु वह क्यों नहीं आ रही है, यह मैं नहीं जानता। वह मुझ पर बड़ा स्नेह रखती है, उसका मन स्थिर है, वह तेजस्वी पत्नी मुझ पर स्नेह रखती है और मेरी परम भक्त है॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.144.11 
सा हि श्रान्तं क्षुधार्तं च जानीते मां तपस्विनी।
अनुरक्ता स्थिरा चैव भक्ता स्निग्धा यशस्विनी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह तपस्विनी स्त्री जानती है कि मैं थका हुआ, क्षीण और भूखा हूँ, परन्तु वह क्यों नहीं आ रही है, यह मैं नहीं जानता। वह मुझ पर बड़ा स्नेह रखती है, उसका मन स्थिर है, वह तेजस्वी पत्नी मुझ पर स्नेह रखती है और मेरी परम भक्त है॥ 11॥
 
‘That ascetic woman knows that I am tired, weary and hungry, but I do not know why she is not coming. She has great affection for me, her mind is steady, that glorious wife is affectionate towards me and is my greatest devotee.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)