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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 144: कबूतरद्वारा अपनी भार्याका गुणगान तथा पतिव्रता स्त्रीकी प्रशंसा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.144.1 
भीष्म उवाच
अथ वृक्षस्य शाखायां विहङ्ग: ससुहृज्जन:।
दीर्घकालोषितो राजंस्तत्र चित्रतनूरुह:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! उस वृक्ष की शाखा पर एक कबूतर अपने मित्रों के साथ बहुत समय से रहता था। उसके शरीर पर बाल थे।
 
Bhishmaji says - O King! A pigeon had been living on the branch of that tree with his friends for a long time. The hair on his body was spotted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)