श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.143.9 
मुनिरुवाच
धर्मनिश्चयसंयुक्तां कामार्थसहितां कथाम्।
शृणुष्वावहितो राजन् गदतो मे महाभुज॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले- महाबाहो! यह कथा धर्म के निर्णय से युक्त तथा धन और कामना से परिपूर्ण है। राजन! सावधान होकर मेरे मुख से यह कथा सुनो॥9॥
 
The sage said- Mahabaho! This story is full of the decision of religion and is full of wealth and desire. King! Be careful and listen to this story from my mouth.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)