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mahabharat 12.143.8: हे मनुष्यों के स्वामी! तब परशुराम ने मुचुकुन्द को, जो सुनने के लिए उत्सुक थे, कबूतर की सफलता की कथा सुनाई।   |   mahabharat अध्याय 12.143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.143.8 
तस्मै शुश्रूषमाणाय भार्गवोऽकथयत् कथाम्।
इमां यथा कपोतेन सिद्धि: प्राप्ता नराधिप॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तब परशुराम ने मुचुकुन्द को, जो सुनने के लिए उत्सुक थे, कबूतर की सफलता की कथा सुनाई।
 
Lord of men! Then Parasurama narrated to Muchukunda, who was eager to listen, the story of how the pigeon had achieved success.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)