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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना
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श्लोक 7
श्लोक
12.143.7
इममर्थं पुरा पार्थ मुचुकुन्दो नराधिप:।
भार्गवं परिपप्रच्छ प्रणत: पुरुषर्षभ॥ ७॥
अनुवाद
पुरुषप्रवर कुन्तीनन्दन! इससे पहले राजा मुचुकुन्द ने परशुरामजी को प्रणाम करके उनसे यही प्रश्न किया था। 7॥
Purushpravara Kuntinandan! Earlier, King Muchukund had saluted Parashuramji and asked him the same question. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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