ऐसा कहकर उसने भूमि पर पत्ते बिछा दिए और एक चट्टान पर सिर रखकर महान दुःख से घिरा हुआ वह शिकारी वहीं सो गया।
Having said this he spread leaves on the ground and putting his head on a rock the hunter, surrounded by great sorrow, went to sleep there.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि कपोतलुब्धकसंवादोपक्रमे त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें कपोत और व्याधके संवादका उपक्रमविषयक एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥