श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.143.22 
नैव निम्नं स्थलं वापि सोऽविन्दत विहङ्गहा।
पूरितो हि जलौघेन तस्य मार्गो वनस्य च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जिस वन पथ पर वह चल रहा था, वह जल के प्रवाह में डूबा हुआ था। शिकारी ऊँचे-नीचे का भेद नहीं पहचान पा रहा था।
 
The forest path on which he was walking was submerged in the flow of water. The hunter could not tell the difference between high and low. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)