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mahabharat 12.143.21: उस समय भारी वर्षा हो रही थी। शिकारी ठंड के कारण बेहोश हो गया और व्यथित मन से पूरे जंगल में भटकने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.143.21 
ततो धाराकुले काले सम्भ्रमन् नष्टचेतन:।
शीतार्तस्तद् वनं सर्वमाकुलेनान्तरात्मना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय भारी वर्षा हो रही थी। शिकारी ठंड के कारण बेहोश हो गया और व्यथित मन से पूरे जंगल में भटकने लगा।
 
At that time it was raining heavily. The hunter became unconscious due to the cold and started wandering in the whole forest with a troubled heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)