Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.143.19-20: आकाश बादलों से आच्छादित था और विद्युत क्षेत्र उसे अत्यंत सुंदर बना रहा था। जैसे समुद्र नाविकों की भीड़ से आच्छादित हो जाता है, वैसे ही भगवान इंद्र ने जलधाराओं की भीड़ से आच्छादित आकाश में मात्र दो घड़ी में प्रवेश किया और क्षण भर में पृथ्वी को जल से भर दिया। | mahabharat अध्याय 12.143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आकाश बादलों से आच्छादित था और विद्युत क्षेत्र उसे अत्यंत सुंदर बना रहा था। जैसे समुद्र नाविकों की भीड़ से आच्छादित हो जाता है, वैसे ही भगवान इंद्र ने जलधाराओं की भीड़ से आच्छादित आकाश में मात्र दो घड़ी में प्रवेश किया और क्षण भर में पृथ्वी को जल से भर दिया।
The sky was covered with clouds and the electric field made it look very beautiful. Just like the sea is covered by a crowd of boatmen, in the same way Lord Indra entered the sky covered by a crowd of water streams in just two hours and in a moment filled the earth with water.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥