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mahabharat 12.143.15: हे मनुष्यों के स्वामी! वह प्रतिदिन जाल लेकर जंगल में जाता और बहुत से पक्षियों को मारकर बाजार में बेच देता।   |   mahabharat अध्याय 12.143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.143.15 
स वै क्षारकमादाय द्विजान् हत्वा वने सदा।
चकार विक्रयं तेषां पतङ्गानां जनाधिप॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वह प्रतिदिन जाल लेकर जंगल में जाता और बहुत से पक्षियों को मारकर बाजार में बेच देता।
 
O Lord of men! Every day he would go to the forest with a net and kill many birds and sell them in the market.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)