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mahabharat 12.143.14: जो मनुष्य क्रूर, दुष्टचित्त और दूसरे प्राणियों के प्राण हरने वाले हैं, वे सर्पों के समान समस्त प्राणियों से उपद्रव पाते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.143.14 
ये नृशंसा दुरात्मान: प्राणिप्राणहरा नरा:।
उद्वेजनीया भूतानां व्याला इव भवन्ति ते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य क्रूर, दुष्टचित्त और दूसरे प्राणियों के प्राण हरने वाले हैं, वे सर्पों के समान समस्त प्राणियों से उपद्रव पाते हैं ॥14॥
 
Those men who are cruel, evil-minded and take away the lives of other creatures, they receive disturbance from all living beings like serpents. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)