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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 143: शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिये और कपोत-कपोतीका प्रसंग, सर्दीसे पीड़ित हुए बहेलियेका एक वृक्षके नीचे जाकर सोना
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श्लोक 13
श्लोक
12.143.13
नर: पापसमाचारस्त्यक्तव्यो दूरतो बुधै:।
आत्मानं योऽभिसंधत्ते सोऽन्यस्य स्यात् कथं हित:॥ १३॥
अनुवाद
वास्तव में बुद्धिमान पुरुषों को पापी मनुष्य से दूर रहना चाहिए। जो अपने को धोखा देता है, वह दूसरों का हितैषी कैसे हो सकता है?॥13॥
In reality, wise men should avoid a person who is a sinner. How can a person who deceives himself be a well-wisher of others?॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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