श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.142.9 
पार्श्वत: करणं प्राज्ञो विष्टम्भित्वा प्रकारयेत्।
जनस्तच्चरितं धर्मं विजानात्यन्यथान्यथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि विचार करते समय अपने प्रत्येक कार्य को पहले गुप्त रखे; फिर उसे प्रकट करे; अन्यथा लोग उसके द्वारा किए गए धर्म को किसी अन्य रूप में समझने लगते हैं॥9॥
 
When thinking, a wise man should start his every action by keeping it secret; then he should make it public; otherwise people start understanding the Dharma (righteousness) practised by him in some other form.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)