श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.142.6 
बुद्धिश्रेष्ठा हि राजानश्चरन्ति विजयैषिण:।
धर्म: प्रतिविधातव्यो बुद्धॺा राज्ञा ततस्तत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो राजा विजय की इच्छा रखते हैं और बुद्धि में श्रेष्ठ हैं, वे सभी धर्म का आचरण करते हैं। अतः राजा को चाहिए कि वह बुद्धि के द्वारा इधर-उधर से शिक्षा ग्रहण करके धर्म का भली-भाँति आचरण करे॥6॥
 
All kings who desire victory and are superior in intelligence practice Dharma. Therefore, the king should practice religion well by taking education from here and there through wisdom. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)