श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.142.5 
बुद्धिसंजननो धर्म आचारश्च सतां सदा।
ज्ञेयो भवति कौरव्य सदा तद् विद्धि मे वच:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! सत्पुरुषों का धर्म और आचरण - ये बुद्धि से ही प्रकट होते हैं और बुद्धि से ही सदा जाने जाते हैं। कृपया मेरी बात को अच्छी तरह समझ लीजिए।
 
Kurunandan! Religion and conduct of good men - these are revealed only by the intellect and are always known by it. Please understand my point very well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)