ब्राह्मणों के प्रसन्न होने से महान यश की प्राप्ति होती है। उनके अप्रसन्न होने से महान भय उत्पन्न होता है। जब ब्राह्मण प्रसन्न होते हैं, तब वे अमृत के समान जीवनदायी होते हैं और जब वे क्रोधित होते हैं, तब वे विष के समान भयंकर हो जाते हैं ॥38॥
The happiness of Brahmins leads to great fame. Their displeasure leads to great fear. When Brahmins are happy, they are life-giving like nectar and when they are angry, they become as dreadful as poison. ॥38॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि द्विचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें एक सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)