श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.142.36 
भीष्म उवाच
ब्राह्मणानेव सेवेत विद्यावृद्धांस्तपस्विन:।
श्रुतचारित्रवृत्ताढॺान् पवित्रं ह्येतदुत्तमम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! जो सुशिक्षित तपस्वी, शास्त्रज्ञ, उत्तम चरित्र और उत्तम आचरण वाले ब्राह्मण हों, उन्हीं का भोजन करना चाहिए, यही परम श्रेष्ठ और पवित्र कार्य है॥36॥
 
Bhishmaji said – King! One should consume only those Brahmins who are well-educated ascetics and have knowledge of scriptures, good character and good conduct, this is the most noble and sacred work. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)