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mahabharat 12.142.35: युधिष्ठिर ने पूछा - "हे महात्माओं में श्रेष्ठ पितामह! यदि इस संसार में कोई ऐसी मर्यादा है जिसका उल्लंघन कोई दूसरा न कर सके, तो मैं आपसे उसके विषय में पूछूँगा। कृपया मुझे वही बताइए।" ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.142.35 
युधिष्ठिर उवाच
अस्ति चेदिह मर्यादा यामन्यो नाभिलङ्घयेत्।
पृच्छामि त्वां सतां श्रेष्ठ तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - "हे महात्माओं में श्रेष्ठ पितामह! यदि इस संसार में कोई ऐसी मर्यादा है जिसका उल्लंघन कोई दूसरा न कर सके, तो मैं आपसे उसके विषय में पूछूँगा। कृपया मुझे वही बताइए।" ॥35॥
 
Yudhishthira asked, "O Grandfather, the best of the noble souls! If there is any such limit in this world which no one else can violate, then I will ask you about it. Please tell me the same." ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)