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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 142: आपात्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश
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श्लोक 34
श्लोक
12.142.34
अशिष्टनिग्रहो नित्यं शिष्टस्य परिपालनम्।
एवं शुक्रोऽब्रवीद् धीमानापत्सु भरतर्षभ॥ ३४॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! विपत्ति के समय भी मनुष्य को दुष्टों का दमन करना चाहिए और सज्जनों का अनुसरण करना चाहिए, ऐसा बुद्धिमान शुक्राचार्य कहते हैं॥34॥
Bharatshrestha! Even in times of adversity, one should always suppress the wicked and follow the virtuous people, says the wise Shukracharya. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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