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mahabharat 12.142.29: जिस राजा के राज्य में डाकुओं के समूह दूसरों का धन उसी प्रकार चुराते हैं, जैसे बगुला जल से मछली पकड़ता है, वह राजा निश्चित रूप से क्षत्रिय कुल के लिए कलंक है।   |   mahabharat अध्याय 12.142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.142.29 
यस्य दस्युगणा राष्ट्रे ध्वांक्षा मत्स्यान् जलादिव।
विहरन्ति परस्वानि स वै क्षत्रियपांसन:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा के राज्य में डाकुओं के समूह दूसरों का धन उसी प्रकार चुराते हैं, जैसे बगुला जल से मछली पकड़ता है, वह राजा निश्चित रूप से क्षत्रिय कुल के लिए कलंक है।
 
A king in whose kingdom gangs of robbers steal other people's wealth like a heron catches fish from the water is certainly a disgrace to the Kshatriya clan. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)