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mahabharat 12.142.28: अतः केवल तीक्ष्ण स्वभाव वाला राजा ही अपनी प्रजा को स्वधर्म का पालन करा सकता है; अन्यथा सारी प्रजा भेड़ियों की तरह स्वतन्त्र होकर एक-दूसरे को लूटती और खाती फिरेगी॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.142.28 
तस्मात् तीक्ष्ण: प्रजा राजा स्वधर्मे स्थापयेत् तत:।
अन्योन्यं भक्षयन्तो हि प्रचरेयुर्वृका इव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः केवल तीक्ष्ण स्वभाव वाला राजा ही अपनी प्रजा को स्वधर्म का पालन करा सकता है; अन्यथा सारी प्रजा भेड़ियों की तरह स्वतन्त्र होकर एक-दूसरे को लूटती और खाती फिरेगी॥28॥
 
Therefore only a king with a sharp temperament can make his subjects follow their own religion; otherwise all the subjects will roam around freely like wolves, plundering and eating each other.॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)