Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.142.22: वे लोग केवल तर्क को ही महत्व देते हुए कहते हैं कि शास्त्रों की इस बात का खण्डन अमुक तर्क से हो सकता है; अतः यह बात व्यर्थ है; परन्तु यह बात भी अज्ञान के कारण ही है (अतः शास्त्रों को तर्क से और तर्क को शास्त्रों से समझने की अपेक्षा, दोनों के सहयोग से जो कर्तव्य निश्चित हो, उसका पालन करना चाहिए)। पूर्वकाल में शुक्राचार्य ने स्वयं दैत्यों से यह संशयनाशक बात कही थी। | mahabharat अध्याय 12.142: आपात्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे लोग केवल तर्क को ही महत्व देते हुए कहते हैं कि शास्त्रों की इस बात का खण्डन अमुक तर्क से हो सकता है; अतः यह बात व्यर्थ है; परन्तु यह बात भी अज्ञान के कारण ही है (अतः शास्त्रों को तर्क से और तर्क को शास्त्रों से समझने की अपेक्षा, दोनों के सहयोग से जो कर्तव्य निश्चित हो, उसका पालन करना चाहिए)। पूर्वकाल में शुक्राचार्य ने स्वयं दैत्यों से यह संशयनाशक बात कही थी।
Those people, giving importance to logic alone, say that this point of the scriptures can be refuted by a certain argument; therefore, it is useless; but this statement is also due to ignorance (therefore, instead of understanding the scriptures by logic and logic by the scriptures, one should follow the duty which is decided with the cooperation of both). In the past, Shukracharya himself had said this doubt-dispelling thing to the demons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥