श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.142.2 
सम्मुह्यामि विषीदामि धर्मो मे शिथिलीकृत:।
उद्यमं नाधिगच्छामि कदाचित् परिसान्त्वयन्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं आपसे यह वृत्तांत सुनकर मोहित और दुःखी हूँ। आपने धर्म के प्रति मेरे उत्साह को क्षीण कर दिया है। मैं बार-बार अपने मन को समझाने का प्रयत्न कर रहा हूँ, परन्तु फिर भी मुझे इस धर्म-कार्य में कोई उत्साह नहीं मिल रहा है।॥2॥
 
I am fascinated and saddened to hear this story from you. You have weakened my enthusiasm for religion. I am trying to convince my mind again and again, but still I do not find any enthusiasm for this religious endeavor.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)