श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.142.18 
न त्वेव वचनं किंचिदनिमित्तादिहोच्यते।
सुविनीतेन शास्त्रेण न व्यवस्यन्त्यथापरे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् पुरुष बिना कारण कुछ नहीं कहते और बहुत से अन्य लोग शास्त्रों को अच्छी तरह सीखकर भी उनके अनुसार आचरण करने का प्रयत्न नहीं करते ॥18॥
 
Learned men do not say anything without reason and many other people, even after learning the scriptures well, do not make any effort to act according to them. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)