श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.142.13 
अपक्वमतयो मन्दा न जानन्ति यथातथम्।
यथा ह्यशास्त्रकुशला: सर्वत्रायुक्तिनिष्ठिता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जिनकी बुद्धि परिपक्व नहीं हुई है, वे मंदबुद्धि मनुष्य का वास्तविक तत्त्व नहीं जानते। वे शास्त्रों के ज्ञान में पारंगत न होकर सर्वत्र असंगत युक्तियों का ही अवलम्बन करते हैं। 13॥
 
Those whose intellect has not matured do not know the real essence of the slow minded human being. Instead of being proficient in the knowledge of scriptures, they rely everywhere on inconsistent tactics. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)