Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.142.12: हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग जीविकोपार्जन की इच्छा से विद्या प्राप्त करते हैं, उस विद्या के बल से सब ओर यश प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं और अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, वे सब पापी और धर्मद्रोही हैं॥12॥ | mahabharat अध्याय 12.142: आपात्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग जीविकोपार्जन की इच्छा से विद्या प्राप्त करते हैं, उस विद्या के बल से सब ओर यश प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं और अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, वे सब पापी और धर्मद्रोही हैं॥12॥
O Lord of men! Those who acquire knowledge with the desire to earn a living, who desire to gain fame in all directions with the power of that knowledge and to acquire the things they desire, are all sinners and traitors to religion. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥