श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 142: आपात‍्कालमें राजाके धर्मका निश्चय तथा उत्तम ब्राह्मणोंके सेवनका आदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.142.11 
परिमुष्णन्ति शास्त्राणि धर्मस्य परिपन्थिन:।
वैषम्यमर्थविद्यानां निरर्था: ख्यापयन्ति ते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धर्मद्रोही लोग शास्त्रों की प्रामाणिकता पर आक्रमण करके उन्हें अस्वीकार्य एवं अमान्य घोषित करते हैं। अर्थशास्त्र के अज्ञानी लोग अर्थशास्त्र की विषमता का मिथ्या प्रचार करते हैं ॥11॥
 
The traitors to religion attack the authenticity of the scriptures and declare them unacceptable and invalid. Those people who lack economic knowledge propagate the falsehood of the inequality of economics. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)