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mahabharat 12.141.99: उस कार्य को पूरा करके उन महामुनि ने बिना चखे ही देवताओं और पितरों को तृप्त कर दिया और उनकी कृपा से पवित्र भोजन प्राप्त करके उसका सेवन करके अपने प्राण बचा लिए।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  12.141.99 
स संहृत्य च तत् कर्म अनास्वाद्य च तद्धवि:।
तोषयामास देवांश्च पितॄंश्च द्विजसत्तम:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
उस कार्य को पूरा करके उन महामुनि ने बिना चखे ही देवताओं और पितरों को तृप्त कर दिया और उनकी कृपा से पवित्र भोजन प्राप्त करके उसका सेवन करके अपने प्राण बचा लिए।
 
Having completed that task, that great sage satisfied the gods and forefathers without even tasting the offering and by their grace, having obtained the holy food, he saved his life by using it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)