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mahabharat 12.141.98: भगवान् विश्वामित्र ने भी दीर्घकाल तक निराहार रहकर तथा कठोर तप करके अपने समस्त पापों को जला डाला था; अतः उन्हें एक अद्भुत सिद्धि प्राप्त हुई थी॥ 98॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  12.141.98 
विश्वामित्रोऽपि भगवांस्तपसा दग्धकिल्बिष:।
कालेन महता सिद्धिमवाप परमाद्भुताम्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
भगवान् विश्वामित्र ने भी दीर्घकाल तक निराहार रहकर तथा कठोर तप करके अपने समस्त पापों को जला डाला था; अतः उन्हें एक अद्भुत सिद्धि प्राप्त हुई थी॥ 98॥
 
Lord Viswamitra had also burnt away all his sins by fasting without any food for a long time and by performing austerities; hence he attained a very wonderful accomplishment.॥ 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)