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mahabharat 12.141.96: भरतनंदन! फिर उन्होंने देवकर्म और पितृकर्म आरम्भ किया। इन्द्र आदि देवताओं का आवाहन करके उन्हें क्रमशः अलग-अलग भाग अर्पित किए। 96॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.96 
तत: समारभत् कर्म दैवं पित्र्यं च भारत।
आहूय देवानिन्द्रादीन् भागं भागं विधिक्रमात्॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! फिर उन्होंने देवकर्म और पितृकर्म आरम्भ किया। इन्द्र आदि देवताओं का आवाहन करके उन्हें क्रमशः अलग-अलग भाग अर्पित किए। 96॥
 
Bharatnandan! Then he started Devkarma and Pitrukarma. After invoking gods like Indra, they offered separate portions to them respectively. 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)